5) ज़रुरत अनुसार निवेश
बजाये इन बातों पर लड़ने के कि किसने किसके माँ-बाप या घरवालों को कितना महँगा-सस्ता गिफ़्ट दिया, उस पैसे को अपनी ज़रुरत का सामान ख़रीदने पर लगाएँ या ऐसी जगह निवेश करें जहाँ भविष्य में अच्छे मुनाफ़े की उम्मीद हो!
रिश्तों को पैसे के तराजू में ना तोलें, इनका कोई मोल नहीं होता|
इसीलिए ज़रूरी है कि रूपए-पैसे सम्बन्धी सभी विचार-विमर्श खुल के हो जाएँ ताकि दिल में कोई बात रह ना जाए! फिर जी भर के जियें, रिश्तों का आनंद उठाएँ!