14 सितम्बर का दिन हर वर्ष हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है.
वैसे तो ये हिंदी को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है विडम्बना ये है कि धीरे धीरे राष्ट्र भाषा हिंदी की अहमियत बस हिंदी दिवस तक ही रह गयी है.
आज का भारतीय युवा हिंदी से दूर जा रहा है इसकी कई वजहें है जिनमे से सबसे बड़ी वजह ये है कि उन्हें हिंदी के स्वर्णकाल और हिंदी के प्रसिद्ध लेखक और कवियों के बारे में जानकारी नहीं है. उन्हें ये नहीं पता कि हिंदी में कैसे कैसे महान लेखक और कवि हुए है जिनकी रचानाएँ तब भी समसामयिक थी और आज भी है.
पिछली कड़ी में हमने आपको हिंदी के प्रसिद्ध उपन्यासकारों के बारे में बताया आज हम आपको हिंदी दिवस पर हिंदी भाषा के प्रसिद्ध कवियों के बारे में जानकारी देते है.
माखनलाल चतुर्वेदी
चाह नहीं मैं सुरबाला के,
गहनों में गूँथा जाऊँ,
चाह नहीं प्रेमी-माला में,
बिंध प्यारी को ललचाऊँ,
चाह नहीं, सम्राटों के शव,
पर, हे हरि, डाला जाऊँ
चाह नहीं, देवों के शिर पर,
चढ़ूँ भाग्य पर इठलाऊँ!
मुझे तोड़ लेना वनमाली!
उस पथ पर देना तुम फेंक,
मातृभूमि पर शीश चढ़ाने
जिस पथ जाएँ वीर अनेक।